Skip to main content

है तो क्या।

हुकूमत में होगा,  
ना सही, ना मिले,  
वो बड़ा अफ़सर है तो क्या।  

भूख से मरते हैं बच्चे,  
खाली पेट उठाते हैं वज़न अपना,  
इस बड़े शहर में, आबाद लंगर है तो क्या।  

हम फिर भी बोएंगे बीज इसमें,  
ये ज़मीन बंजर है तो क्या।  

पानी ही सही, लड़ने के लिए,  
इस देश की दाल में, कंकड़ है तो क्या।  

अर्ज़ियों, धरनों, मोर्चों के बाद,  
अब घेराव अंदर घुसकर होगा,  
फिर वो बड़े नेता का दफ़्तर है तो क्या।  

जब ज़रूरत होगी,  
गरम लोहा भी उठाया जाएगा,  
अब कोई किसान, मज़दूर, बुनकर है तो क्या।  

करेंगे संघर्ष लगातार, जूझेंगे,  
हड्डियाँ जवाब दें चाहे,  
या फिर साँस चुक जाए तो क्या।  

हम फिर भी बोएंगे बीज इसमें,  
ये ज़मीन बंजर है तो क्या…

Comments

Popular posts from this blog

तक़ाज़ा

वक़्त तक़ाज़ा करता रहा हमेशा,   ना पूछा क्या बीत रही है, बीतने वाले पर।   ना मुल्क रहा, ना मोहब्बत का रिश्ता ज़मीन से,   अब कोई हैरान नहीं होता वतन से जाने वाले पर।   जब दर्द सूख जाए बहने के बाद,   तब कोई ताने देता है, आँसू बहाने वाले पर।   अरज़ियाँ दीजिए या धरना करिए तयशुदा जगह पर,   अब सरकारी फ़रमान आता है, हथियार उठाने वाले पर।   न जाने किसे मिली आज़ादी, ये मज़दूर पूछता है,   धिहाड़ी अब भी वही लड़ी जाती है, ख़ून-पसीना बहाने वाले पर।   हुकूमत के ज़ुल्म की इंतिहा नहीं तो और क्या है,   अब गोली चलाई जाती है, परचा लगाने वाले पर।

सह अस्तित्व

यह सच में एक त्रासदी है,   जब वास्तविकता के किनारों पर  खड़ा तेज दिमाग   उस दिल के साथ जगह बाँटता है,   जो अब भी सपने देखने का  हौसला रखता है।   यह ठंडी निश्चितताओं  और अनहोनी ख्वाहिशों के बीच   फँसे रहने जैसा है   बेमेल होने पर भी,  संग-संग बँधे हुए,   एक ही सांस में विपरीत  सत्यों की कानाफूसी  फिर भी शायद…  कहीं, किसी दिन,   किसी कम वीरान पल में,   जब दुनिया अपनी पीड़ाओं का भार कुछ हल्का कर पाएगी,   हम दोबारा मिल सकते हैं।   खड़े हो सकते हैं उस जगह पर,  जहाँ समय और पछतावा   धुंधले पड़ जाएँ,   जहाँ तर्क और तड़प के छोड़े निशान   अब दर्द की गूँज में न बसें। उस ख़ास वक़्त में,  शायद मेरा दिमाग  और दिल अब न लड़ेंगे।   शायद मैं सीख लूँगा  कि एक को, दूसरे को   खामोश करने की जरूरत नहीं—   कि मेरे दिल की तमन्ना  और दिमाग की समझ   मिलकर रह सकते हैं,  सह अस्तित्व में।   एक, दूसरे को  ताकत देते हुए    जैसे हम उस  पल ...